पुश्तैनी ज्ञान से स्थानीय लोग बने 'प्रकृति के संरक्षक', अज्ञानियों से 10 लाख प्रजातियां को खतरा
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक अमेजन के वर्षावनों से आर्कटिक वृत्त तक मूल निवासी परिस्थितिकी संरक्षण के लिये अपने पुश्तैनी ज्ञान का लाभ उठा रहे हैं जिसकी वजह से सैकड़ों और हजारों सालों से उनका अस्तित्व बरकरार है।
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